रविवार, 21 जून 2015

मानस मंथन से------

      सृजन

जब रिमझिम हो बरसात
और भीगें डाल औ पात
जब तितली रंग ले अंग
और फूल खिलें सतरंग
  जब कण –कण महके प्रीत
  तब शब्द रचेंगे गीत |

जब नभ पे हँसता चाँद
ओंर तारे भरते माँग
जब पवन चले पुरवाई
हर दिशा सजे अरुणाई

जब मन छेड़े संगीत
तब शब्द लिखेंगे गीत |

जब पंछी करें किलोल
और लहरों में हिलोल
जब धरती अम्बर झूमें
और भँवरे कलिका चूमें
  जब बंधन की हो रीत
  तब शब्द बुनेंगे गीत |

जब कोकिल मिश्री घोले
पपिहारा पिहु-पिहु बोले
 वासन्ती पाहुन आए
नयनों से नेह बरसाए
   जब संग चले मनमीत
   तब शब्द बनेंगे गीत |


 शशि पाधा 

5 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, नारी शक्ति - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर ,मन को छूते शब्द ,शुभकामनायें और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. मदन मोहन जी, आपका हार्दिक धन्यवाद |

      हटाएं
    2. मदन मोहन जी, आपका हार्दिक धन्यवाद |

      हटाएं